जैसे को तैसा - पंचतंत्र की कहानियां | Panchtantra Ki Nayi Kahani

इंटरनेट पर तो आपको बहुत सारी (Panchtantra Ki Nayi Kahani) पंचतंत्र नई कहानियाँ पढ़ने को मिल जाएगी। लिकिन इस कहानी को पढ़ने के कुछ रूल हैं जैसे- कहानी पढ़ने से पहले आपको ये जरूर पता होना चाहिए। की कहानी किस तरह की हैं? कहानी लिखने का उदेश्य क्या था? लेखक ने ये कहानी क्यों लिखी? 

क्योंकि आज जो आप कहानी पढ़ने वाले हैं वह केवल मेरे ही वेबसाइट पर महजूद हैं क्योंकि ये Panchtantra Ki Nayi Kahani हैं। जो मैंने ख़ुद आपके लिए ही (पंचतंत्र की नई कहानी) लिखी हैं। अपने अनुभव से मैंने इस कहानी को इस तरह से लिखा हैं, की आपको पढ़ने में मजा भी आयेगा और नया कुछ सीखने को भी मिलेगा। चलिये अब कहानी शुरू करते हैं!

यह कहानी दो ऐसे बंदरों की है जो अपने बुद्धि (दिमाग) से किसी भी जानवर को मूर्ख बना सकते थे। वैसे तो उन दोनों बंदरों में हमेशा नोकझोंक होती रहती थी। लेकिन एक दिन नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि वे आपस में ही एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए। 

Panchtantra Ki Nayi Kahani

लेकिन उन दोनों बंदरो में एक बात बहुत ही सामान्य थी कि अगर कोई तीसरा जानवर उन दोनों के झगड़ों के बीच में बोलता तो वे दोनों बंदर आपस में ही मिल जाते और उससे ही दोनों झगड़ा करने लगते।

Panchtantra Ki Nayi Kahani

एक बार की बात है जब दोनों बंदरों की बीच में नोकझोंक हुई तो दोनों बंदरों ने मन बनाया की वे दोनों अब इस जंगल को छोड़ कर शहर चले जाएंगे और वहीं पर अपनी एक नई जिंदगी फिर से शुरु करेंगे।

क्योंकि दोनों बंदरों का मानना था कि अगर वे इसी तरह से लड़ते रहेंगे तो कोई तीसरा जानवर उनकी नोकझोंक का फायदा उठा लेगा। और फिर उनकी बुद्धि और दोस्ती का गलत इस्तेमाल करके जंगल पर राज्य करेगा।

इसलिए वे जंगल छोड़कर शहर की ओर जा रहे थे जब वे दोनों जंगल के बीचो बीच नदी के पास वाली लकड़ी की बनी पुल (ब्रिज) के ऊपर से गुजरे तो उन्होंने एक बहुत ही सुंदर फल देगा जो नदी के बीचों-बीच लगा हुआ था।

Bandar ki Kahani Panchtantra Ki Nayi Kahani

फल देखने में इतना सुंदर था कि वे दोनों बिना आंख की पलक झपकाए एक मिनट तक ऐसे ही देखते रह गए। जैसे उन्होंने कोई एक जादुई अजूबा देख लिया हो।

क्योंकि उन दोनों बंदरों के पास बुद्धि बहुत अधिक थी इसीलिए उन दोनों बंदरों ने सोचा क्यों ना इस फल को तोड़ कर एक बार खा कर देखा जाए कि यह फल कैसा लगता है..? देखने में तो बहुत ही सुंदर लगता हैं! क्यों ना हम इस फल को तोड़ कर शहर ले जाए!

जैसा को तैसा- बुद्धिमान बंदर पंचतंत्र की कहानी Bandar ki kahani: Panchtantra

जैसा को तैसा- बुद्धिमान बंदर पंचतंत्र की कहानी

उन दोनों बंदरों को आपस में बात करते हुए एक लोमड़ी सुन जाती है की वे दोनों इस जादुई फल को तोड़ना चाहते हैं। लोमड़ी को अच्छे से पता था की इस जादुई फल को तोड़ना इतना आसान नहीं है! 

क्यों की इस फल को तोड़ने के लिए नदी के बीचो बीच तैरकर जाना पड़ेगा? और इस तेज नदी में अगर किसी ने अपना पैर भी डाला तो वह कोसो मील नदी के पानी में बह जाएगा!

लेकिन बंदरो के पास बहुत ही अधिक बुद्धि थी इसलिए उन्होने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करके वह फल किसी तरह से थोड़ लिया! 

उधर चालक लोमड़ी यह सब झड़ी के पीछे से चुपके से देख रही थी उसने तुरंत सोचा क्यों ना इन बंदरो से यह जादुई फल ले लिया जाए। 

लोमड़ी सोच रही थी पर कैसे ये तो बहुत ही बुद्धिमन बंदर हैं इन से मैं फल कैसे छीन सकता हूँ…?

अचानक लोमड़ी ! 

को एक विचार आया क्यों ना जंगल के राजा शेर को यह बात बताई जाए तो वह जरूर यह जादुई फल उनसे ले लेगा! 

यही सब सोच कर लोमड़ी शेर के पास गई और उस जादुई फल के बारे में शेर को बता दिया। और कहाँ महाराज अगर आप इस जादुई फल को खा लेगे तो आप कभी भी बूढ़े नहीं होंगे इसी तरह से जवान बने रहेंगे हजारों सालों तक आप अमर हो जाएंगे जिंदगी भर के लिए। 

लोमड़ी की बाते सुनते ही शेर ने तुरंत कहाँ कहा मिलेगे वे बुद्धिमन बंदर आज तो मैं उनकी सारी बुद्धि खा लूगा और उनसे वह जादुई फल ही ले लूगा।

 जल्दी मुझे उनके पास ले चलो ! 

लोमड़ी ने कहा हा चलो मैं तुमको उनके पास ले चलता हूँ ये कहकर लोमड़ी शेर को उसी लकड़ी के पुल के पास ले गई जहां वे दोनों बंदर उस जादुई फल को शहर की और जा रहे थे। 

लोमड़ी के कहा वो देखो महाराज वे दोनों बंदर जा रहे हैं! 

शेर तेजी से बदरों के पास जा पहुंचा और बोला की तुम मेरे जंगल से ये जादुई फल तोड़कर कहा ले जा रहे हो। अब तुमको इसकी सजा मिलेगी!

शेर की बाते सुनकर दोनों बंदर डर गए और बोले महाराज मैं तो इस फल को नदी में से तोड़ा हैं आप गलत समझ रहें हैं मैंने जंगल से कोई भी फल नहीं चुराया हैं। 

बंदरो की बाते सुनकर शेर ज़ोर से बोला हा हा मैं सब जनता हूँ तो की तुमने यह फल नदी से तोड़ा हैं लेकिन इस फल को मैं खाना चाहता हूँ और साथ मैं तुम्हारी बुद्धि भी खाना चाहता हूँ।

ये सुनकर दोनों बंदर समझ गए की ये शेर ऐसे मानने वाला हैं नहीं इसलिए दोनों बंदरो ने शेर से कहाँ मुझे मरने से पहले मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूँ।

शेर ने कहा कहो तुम्हारी आखरी इच्छा क्या हैं दोनों बंदर बहुत ही बुद्धिमान थे इसलिए उन्होने तुरंत शेर से कहाँ महाराज जब हम दोनों इस जादुई फल को तोड़ने के लिए गए थे तो वह पर इस जादुई फल से भी बड़ा फल लगा हुआ था और जब मैंने उसे तोड़ने के लिए अपना हाथ बड़ाया तो उसने मुझे रोका और कहा इस फल को केवल कोई महान राजा ही तोड़ सकता हैं। 

तो महाराज मेरी छोटी सी आखिरी इच्छा है की आप एक महान राजा हैं इसलिए आप वह फल जरूर तोड़े उस फल पर केवल आपका ही अधिकार है।

दोनों बंदरो की बातें सुनकर शेर बोला इसमें कौन सी बड़ी बात मैं उस फल को अभी तोड़ कर लता हूँ। पेड़ तो नदी के बीचों बीच में लगा हूँ था इस लिए शेर वह जा नही सकता था शेर समझ गया की वे बंदर उससे चालाकी कर रहे हैं इसलिए उसने तुरंत बंदरों से कहाँ की तुम मुझे वह ले चालों नहीं तो मैं तुमको यही पर मर डालूँगा।

शेर की बाते सुनकर बंदरों ने कहाँ ठीक महाराज मैं आपको वह ले चलता हूँ। 

ये कहकर दोनों बंदर शेर को नदी के किनारे ले गए और कहाँ देखो महाराज ये हारा हारा जादुई पत्थर नदी के किनारे तैर रहा हैं इसी पत्थर पर आप दोनों बैठ जाए!

मैं दूसरे जादुई पत्थर पर बैठकर आपके पीछे-पीछे आता हूँ दोनों बंदरों की बातें सुनकर लोमड़ी और शेर हरे पत्थर पर चुपके से बैठ गए पत्थर पर बैठते ही पत्थर नदी के बीच में जाने लगा!

तभी दोनों बंदर ज़ोर से हसें और बोले मूर्ख शेर ये कोई जादुई हारा पत्थर नहीं हैं ये तो बहुत बड़े मगरमच्छ की पीठ हैं जिस पर तुम दोनों बड़े आराम से बैठे हो हा. हा. अब ये मगरमच्छ नदी के बीच में ले जाकर तुमको खा लेगा। 

दोनों बंदरों ने अपनी बुद्धि से न केवल अपनी जान बचाई बल्कि अपने दुश्मनों को सजा भी दे दी। जैसा को तैसा 

इस कहानी के माध्यम से दोनों बंदरों से हमें ये सीख मिलती हैं की हम अपनी बुद्धि से अपने दुश्मनों को उन्हीं के जल में उनको फंसा सकते कर उनको सजा भी दे सकते हैं।

Post a Comment