आम के आम गुठलियों के दाम /हिंदी कहानियां

आम के आम गुठलियों के दाम-Hindi Story शिक्षाप्रद कहानी छोटी सी

इस कहानी की शुरुआत एक ऐसे व्यक्ति से होती हैं जो अपने समय में सबसे ज्यादा मालामाल और बुद्धिमान व्यक्ति था। दूर दूर तक उसकी टक्कर का कोई भी व्यक्ति नहीं था इसलिए उसका नाम सेठमूलचंद पड़ा जिसका अर्थ था जितने भी सेठ थे उन सभी का मालिक, मूल का अर्थ इस गांव का मूल निवासी, चंद का अर्थ चंद्रमा जैसा तेज़ और शीतल हैं।

सेठमूलचंद  के गाँव में गरीबी और भूख मरी बहुत ज्यादा थी इसलिए गाँव के ज़्यादा तर लोग दुखी ही रहते थे।

एक बार कहीं से दूसरा बुद्धिमान व्यक्ति उसी गांव में आ गया। जब  इसकी सूचना गांव वालों को पता चली तो सभी गांव वाले उससे मिलने पहुंच गए। और अपनी अपनी समस्या उस बुद्धिमान व्यक्ति को बताने लगे।

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी गांव वालों की बातें अच्छे से सुनी और मन ही मन में सोचने लगा। कि इस गांव के लोग कितने भोले हैं। 

जिसकी वजह से दूसरा बुद्धिमान व्यक्ति जो इस गांव में पहले से ही रह रहा हैं। और इन सभी गांव वालों को बेवकूफ बना रहा हैं।

बुद्धिमान व्यक्ति ने सभी गांव वालों को बताया कि आप सभी की ऐसी स्थिति देख कर मुझे एक तरकीब सूझी है। लेकिन उस तरकीब में थोड़ी बहुत तकलीफे भी हैं।अगर तुम सभी मेरा साथ दो तो मैं पूरी तरह से आप गाँव  वालों की सहायता कर पाऊंगा। और आपकी जिंदगी में फिर से खुसियों को लाकर भर दुगा। 

आम के आम गुठलियों के दाम-Hindi Story शिक्षाप्रद कहानी छोटी सी

गांव वाले उसकी बातें सुनकर प्रसन्न हुए और बोले अगर तुमने हमारी समस्याओं का हल कर दिया तो हम सभी गांव वाले तुमको इस गांव का मुखिया बना देंगे।

तभी पीछे से गांव का दूसरा व्यक्ति बोला, अरे गांव में पहले से ही एक बुद्धिमान व्यक्ति है। तो हमें इस व्यक्ति की क्या जरूरत है।


गांव वालों ने कहा बात तो तुम्हारी ठीक है। पर हम कर भी तो क्या सकते हैं सालों से तो सेठ मूलचंद हम लोगों की परेशानी दूर न कर सका। 

एक बार इस व्यक्ति से भी अपनी परेशानी को बता कर छुटकारा मिल जाए तो इसमें हमारा गांव वालों का क्या जाता है। एक बार इस बुद्धिमान व्यक्ति की भी बातें मान ले क्या पता सच में हमारी परेशानियों से छुटकारा मिल जाए।

गांव वालों ने बुद्धिमान व्यक्ति से कहा ठीक है तुम बताओ हमें क्या करना होगा। बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा आज से तुम जो भी अनाज खेत में से उगावोगे उसमे से आधा हिस्सा माल गोदाम में जमा करोगे। बाकी का हिस्सा अपने लिए और खेत की अगली फसल के लिए रखोगे। यह कहकर बुद्धिमान व्यक्ति वहां से चला गया। 

कुछ दिनों बाद जब ये बात सेठ मूलचंद को पता चली तो उसको बहुत गुस्सा आया। अब सेठ मूलचंद सोचने लगा की अगर अगली बार फिर से वही बुद्धिमान व्यक्ति इस गांव में आ गया तो मेरा क्या होगा लोग मुझसे डरेंगे भी नहीं और मेरा सम्मान भी नहीं करेंगे।

इसीलिए मुझे एक ऐसी योजना बनानी चाहिए जिससे गांव वाले सिर्फ मुझ पर ही विश्वास करें और दूसरे व्यक्ति पर कभी भी विश्वास ही ना करें।


इसलिए उसने योजना बनाई अभी गांव वालों के माल गोदाम में आग लगा दी जाए जिससे उनका सारा धन जल जाएगा और वह फिर से गरीब हो जाएंगे। इस तरह से  वे जीवन भर मेरे गुलाम बने रहेंगे। 


मॉल गोदाम में आग लगाने के  कारण गांव वाले पहले से भी ज्यादा गरीब हो गए अब उनको उस बुद्धिमान व्यक्ति के ऊपर गुस्सा आ रहा था जिसने उनको ये सब करने के लिए कहा था। 

कुछ सालों बाद जब वही बुद्धिमान व्यक्ति गांव आया तो लोगों उसे आँखो से घुर रहे थे तभी बुद्धिमना व्यक्ति बोला आप सभी तो अब बहुत अमीर हो गये होंगे। 

ये बातें सुन कर गांव वालो को बहुत गुस्सा आई और फिर उस बुद्धिमान व्यक्ति को मरने के लिए अपने घर से लाड्डी डंडा निकल लाये। 

बुद्धिमान व्यक्ति को पता चल चूका था की कुछ तो मेरे ख़िलाफ़ साजिस की गई हैं इस लिए ये गांव वाले मुझे मरना चाहते है। 

मैंने तो गाँव वालों की सहायता की थी और मेरा स्वागत करने के बजाय आज जब में बहुत सालों बाद इस गांव में वापस आया तो गांव वाले मुझे मरना चाहते हैं। मैने तो उनकी सहायता की थी लेकिन वे मुझे मरना चाहते हैं यही सब सोचते सोचते वह किसी तरह अपनी जान बचा कर सेठ मूलचंद के माल गोदाम में आ गया।


जब सेठ मूलचंद ने उस बुद्धिमान व्यक्ति को देखा तो उसने कहा अगर तुम मेरे साथ काम करो तो मैं तुम्हारी सहायता कर सकता हूँ।

बुद्धिमान व्यक्ति ने सेठ मूलचंद से कहा ठीक हैं ये कहकर बुद्धिमान व्यक्ति गोदाम से बाहर चला गया और गाँव वालों को बता दिया की आज मैं तुमको तुम्हारी इस दशा के पीछे का राज बताने वाला हूँ इसके लिए तुम सभी गाँव वालों को सेठ मूलचंद के गोदाम में आना होगा और जब तक मैं न कहूँ कोई भी सेठ मूलचंद के गोदाम में सोर नहीं मचाएगा। गाँव वालों ने कहा ठीक हैं अगर इस बार भी तुमने कुछ गलत किया तो तुमको गाँव के बाहर छोड़ दिया जाएगा। 

बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा ठीक हैं मैं तुम्हारी सभी सरते मनाने के लिए तैयार हूँ। पर तुमको भी मेरी सरते मनानी होगी। 

ये कहकर बुद्धिमान व्यक्ति सेठ मूलचंद के गोदाम में चला गया और पीछे से गाँव वाले भी छुपके छुपके से गोदाम में चले गए।

अब बुद्धिमान व्यक्ति ने अपने दिमाक से कुछ ऐसा करना चाहता था जिससे सेठ मूलचंद ख़ुद ब ख़ुद अपना जुर्म काबुल कर दे। 

इसलिए उसने अपने प्लान के मुताबिक सेठ मूलचंद से बात करने लगा।

सेठ मूलचंद उस बुद्धिमान व्यक्ति की बातें सुनकर हंसने लगा। और कहने लगा गांव वाले बहुत ही भोले हैं। अगर तुम मेरे साथ काम करो तो मैं तुमको बचा सकता हूं।

बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा कैसे आप मुझे बच सकते हैं। सेठ मूलचंद ने कहा ये सब मुझ पर छोड़ दू मैं गांव वालों को अच्छे से समझा दुगा। की जो तुम्हारे  गांव वालों के गोदाम में आग लागी थी। वह इसने नहीं लगाई हैं।

बुद्धिमान व्यक्ति मौका देख कर  बड़ी  चलेगी से पूछा अगर मैंने गांव के माल गोदाम में आग नहीं लगाई तो फिर किसने लगाई।

सेठ मूलचंद कुछ समझ पाता की उससे पहले उसके मुख से निकल पड़ा की मैंने माल गोदाम में आग लगाई थी।

ये सुन कर बुद्धिमान व्यक्ति ने जोर से आवाज लगाई और कहा इसी सच का परदा हटाने के लिए मैंने आपको अपनी चिकनी चुपड़ी बातों में उलझाया की तुम किसी तरह से सच बोल दो।

सेठ मूलचंद ये सुनकर हंसने लगा और कहा तुम पर कौन यकीन करेगा इन बातों पर तभी बुद्धिमान व्यक्ति ने एक और आवाज लगाई। और सभी गांव वाले सेठ मूल चंद के सामन आ गए।

बुद्धिमान व्यक्ति ने  सभी गांव वालों से कहां तुम्हारी इस दशा के पीछे इसी लालची वुक्ति का हाथ हैं। 

अब तुम सभी इसके गोदाम से अपने हिस्से का अनाज ले सकते हो। और इस लालची को अपने गांव से बाहर निकल सकते हो।

बुद्धिमान व्यक्ति ने कहा आम के आम गुठलियों के भी दाम। 

इस तरह से बुद्धिमान व्यक्ति ने गांव वालों को उनका अनाज भी दिलाया और उस  लालची वुक्ति से भी गांव को छुटकारा दिला दिया

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